देश को आज़ाद हुए छह दशक से भी ज़्यादा हो चुके हैं. काफी कुछ बदला है हिंदुस्तान में, पर काफ़ी कुछ बदलना अभी बाकी है. आरक्षण जिसका समाज के दबे-कुचले वर्ग के लिए कम से कम नौकरी और पढाई के क्षेत्र में मददगार भूमिका है आज तक उच्च न्यायपालिका में लागू नहीं हो पाया है. कुछ न्यायमूर्तियों द्वारा अपने मातहत न्यायमूर्तियों की नियुक्ति: यही है न्यायिक पदाधिकारियों के चयन की प्रक्रिया. यही वजह है कि आज तक इक्के दुक्के अपवाद को छोड़कर दबे-कुचले तबक़े को उच्च न्यायपालिका में समुचित अवसर नहीं मिला है. देश के मौजूदा मुख्य न्यायमूर्ति श्री के जी बालाकृष्णन भी अपवाद ही हैं.
दलित, दबे-कुचले तबक़े का उच्च न्यायपालिका में समुचित प्रतिनिधित्व न होना भारतीय समाज की कई और विसंगतियों का भी संकेत है. बहरहाल, विस्तृत चर्चा कभी और. देश भर के वकीलों और न्यायपालिका से जुड़े पदाधिकारियों की ओर से आगामी 2-3 मार्च को नयी दिल्ली स्थित मावलंकर हॉल में उच्च न्यायपालिका में आरक्षण की मांग के समर्थन में एक कन्वेंशन का आयोजन किया जा रहा है. आप तमाम लोगों से अपील है कि ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में कन्वेंशन में पहुंचे और एक बेहतर न्यायप्रणाली के पक्ष में आवाज़ बुलंद करें.
Tuesday, February 26, 2008
2-3 मार्च को मावलंकर हॉल पहुंचें
Labels:
आरक्षण,
उच्च न्यायपालिका,
कन्वेंशन
Subscribe to:
Post Comments (Atom)





8 comments:
बजट का दिन न होता तो जरूर पहुंचता। ये मेरी दिलचस्पी का विषय है। सम्मेलन की रिपोर्ट जरूर लिखें। आपकी इजाजत होगी तो उसे मैं अपने ब्लॉग पर साभार छापना चाहूंगा और इस बारे में अखबारों के लिए भी लिखने की कोशिश करूंगा।
इस सम्मेलन के बारे में क्या कोई लिखित सामग्री मिल पाएगी। आयोजकों का नंबर आदि भी।
दिलीप मंडल
9899128000
dilipcmandal@gmail.com
शानदार। मंथन ज़रूरी है। दिल्ली में होता तो हर हाल में पहुंचता। और दिलीप जी, बजट तो 29 फरवरी को खत्म हो जाएगा। आयोजन तो 2-3 मार्च को है। बजट का इतना हैंगओवर समझ में नहीं आता। मेरा तो यही कहना है कि दिल्ली में रहते हुए आपको इस आयोजन में ज़रूर पहुंचना चाहिए।
अच्छा है। पहुंचाना संभव नहीं, लेकिन जैसाकि दिलीप जी ने कहा, उसकी रिपोर्ट यहां जरूर पोस्ट करिएगा।
शुभकामनाएं..
शुभकामनाएं...
मैं उस बैठक में थी जो इसकी तैयारी के सिलसिले में तीस हज़ारी में हुई थी पिछले हफ़्ते. तीस हज़ारी अदालत के ही कुछ सहकर्मियों ने वो बैठक आयोजित की थी जिसमें इंडियन जस्टिस पार्टी के अध्यक्ष उदित राज भी पहुंचे थे. उदित राज उत्तर भारत में कन्वेंशन की तैयारी देख रहे हैं, चाहें तो दिलीपजी आप उनसे बात कर सकते हैं. मेरे पास कन्वेंशन से संबंधित एक पर्चा है, कल मैं वो स्कैन करके अपने ब्लॉग पर ही डाल दूंगी. कोई विशेष जानकारी मिली तो आपको फ़ोन भी कर दूंगी या आप मेरे नंबर पर भी फोन करते हैं.
समर्थन और शुभकामनाओं के लिए आप तमाम दोस्तों का शुक्रिया. एक बार फिर निवेदन, आइएगा ज़रूर.
उदित राज तो अपने दोस्त हैं। आज ही बात करता हूं। आने की कोशिश जरूर करूंगा।
नून से रहता हूं दूर
ब्लड दबाव रहता है
का+नून से क्यों दूर
समझ नहीं आई हज़ूर.
Post a Comment